तब हर प्राणी की श्वासों में
फिर से पनपे विश्वास नया
इस चिट्ठे पर प्रकाशित सभी रचनाओं का प्रतिलिप्याधिकार चिराग जैन के पास सुरक्षित है। इनके पुनर्प्रकाशन हेतु लेखक की लिखित अनुमति आवश्यक है -चिराग जैन
तुमसे मिलना
जैसे हाईवे पर दौड़ती गाड़ी
दो पल को
ठहरे
किसी पैट्रोल पम्प पर.....
जैसे परवाज़ की ओर बढ़ता परिंदा
यकायक उतर आये धरती पर
पानी की चाह में
.....जैसे बहुत लंबी मरुथली यात्रा के दौरान
हरे पेड़ की छाँव!!!
मौन स्वयं में एक संवाद है
इसको समझने की प्रक्रिया
प्रेम में उतरने की प्रक्रिया है.....
शब्दों का चलन तो बाज़ार में होता है
बाज़ार में मौन नहीं चलता
मौन की भाषा
संवेदना की भाषा है
कितनी मुश्किल है ज़िंदगी की ग़ज़ल
काफिया तंग बहर छोटी है
ख़ूब लम्बी हैं दर्द की रातें
और खुशियों की सहर छोटी है
खारे पानी का अथाह सागर है
मीठे पानी की नहर छोटी है
सागरों पर तो मर मिटी नदियां
सूखे खेतों में नहर छोटी है
ये मुक़द्दर है मेरी किश्ती का
दूर साहिल है लहर छोटी है